फैक्ट्री में मजदूरी करने से लेकर मालिक बनने तक का हरिश का सफर, आज लाखों युवाओं के लिए मिसाल है

फैक्ट्री में मजदूरी करने से लेकर मालिक बनने तक का हरिश का सफर, आज लाखों युवाओं के लिए मिसाल है

हर रोज एक ही समय फैक्ट्री जाना, मशीनों के बीच घंटों काम करना और शाम को थके हुए घर लौट आना, बिजनौर जिले के रहने वाले हरिश की यही जिंदगी बन चुकी थी. बाहर से देखने पर सब कुछ ठीक लगता था. नौकरी थी, आमदनी थी और घर का खर्च भी चल रहा था. लेकिन अंदर ही अंदर हरिश का मन बेचैन रहता था. बार बार दिमाग में बस यही सवाल उठता था कि क्या यही जिंदगी है?

आज से कुछ महीने पहले हरिश एक ऐसी फैक्ट्री में काम करते थे, जहां खेती से जुडे औजार बनाए जाते थे. तनख्वाह से जिम्मेदारियां निभाई जा रही थीं, लेकिन दिल उस काम में नहीं लगता था. क्योंकि हमेशा उनके मन में अपना कुछ करने की इच्छा थी, ऐसा काम जो सिर्फ नौकरी न होकर उनकी पहचान भी बने. मगर रोजमर्रा की जरूरतों और भविष्य की चिंता के बीच वह इच्छा हर बार अधूरी रह जाती थी.

हरिश ने कभी नहीं सोचा था कि वे एक दिन तय नौकरी छोडकर खुद का कारोबार शुरू करेंगे. क्योंकि जोखिम लेने की हिम्मत तो थी, लेकिन रास्ता साफ नजर नहीं आता था. फिर भी कहीं न कहीं यह एहसास लगातार बना हुआ था कि अगर अब भी कोशिश नहीं की, तो शायद कभी नहीं कर पाएंगे.

एक छोटा वीडियो, जिसने रास्ता दिखाया:

एक दिन फैक्ट्री में काम के दौरान ब्रेक मिला. हरिश यूं ही मोबाइल देखने लगे. तभी उनकी नजर एक छोटे से वीडियो पर पडी, जिसमें पहली बार बिजनेस शुरू करने वालों के लिए सरकार की एक लोन योजना के बारे में बताया जा रहा था. शुरुआत में हरिश को इस पर भरोसा नहीं हुआ. उन्हें लगा कि ऐसी योजनाएं सुनने में तो अच्छी लगती हैं, लेकिन जमीन पर शायद ही काम करती हों.

इसके बावजूद हरिश ने इस बात को नजरअंदाज नहीं किया. उन्होंने साथ काम करने वाले लोगों से पूछा, अपने इलाके के दफ्तर जाकर इससे जुड़ी और जानकारी ली. धीरे धीरे उन्हें समझ आने लगा कि यह योजना सच में है और अगर सही तरीके से कोशिश की जाए, तो इसमें मदद मिल सकती है.इसके बाद ही उन्होंने जरूरी कागजात जुटाने का सिलसिला शुरू करने के साथ ही उन्होंने यह भी सोचना शुरू किया कि ऐसा कौन सा काम किया जाए, जिसे लंबे समय तक संभाला जा सके और जिसमें उनका भरोसा भी बना रहे.

लोन मंजूर और जिंदगी का बडा फैसला:

कुछ ही महीनों की मेहनत और भागदौड के बाद उत्तर प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान योजना के तहत हरिश का लोन मंजूर हो गया. जिस दिन उन्हें यह खबर मिली, उसी दिन उन्होंने नौकरी छोडने का फैसला कर लिया.यह फैसला आसान नहीं था. एक तय आमदनी छोडना किसी के लिए भी डरावना होता है. लेकिन हरिश जानते थे कि अगर अब भी पीछे हटे, तो शायद जिंदगी भर यही सोचते रह जाएंगे कि काश कोशिश की होती.

सरसों तेल का काम क्यों चुना:

हरिश ने कोल्ड प्रेस्ड सरसों तेल का छोटा मिल लगाने का फैसला किया. यह ऐसा उत्पाद था, जिसे वे खुद रोज इस्तेमाल करते थे और अच्छी तरह समझते भी थे. उन्होंने अपने आसपास देखा था कि बाजार में मिलने वाला बहुत सा सरसों तेल साफ सुथरी जगहों पर नहीं बनता और न ही सही तरीके से प्रोसेस किया जाता है.यही अनुभव उनके लिए सबसे बडी प्रेरणा बना. उन्होंने तय किया कि अगर काम शुरू करना है, तो शुद्धता और सही प्रक्रिया के साथ ही करेंगे.

छोटा यूनिट, लेकिन पूरी जिम्मेदारी:

हरिश की यूनिट बहुत बडी नहीं है. मशीनें सीमित हैं और वहां सिर्फ दो लोग काम करते हैं, जिनमें हरिश खुद भी शामिल हैं. ठंडे तापमान पर बिना गर्म किए सरसों से तेल निकाला जाता है, ताकि उसके प्राकृतिक गुण बने रहें.हर प्रक्रिया पर हरिश की खुद की नजर रहती है. कच्चा माल कैसा है, तेल कैसे निकल रहा है और तैयार तेल की क्वालिटी कैसी है, सब कुछ वे खुद देखते हैं.

बीज से लेकर बिक्री तक सब कुछ खुद:

सरसों के बीज हरिश स्थानीय मंडियों से खरीदते हैं. वहां गुणवत्ता में काफी फर्क होता है, इसलिए वे खुद बीज चुनते हैं और उनकी सफाई करते हैं. इसके बाद तेल निकालने के बाद उसे छाना जाता है और सीधे दुकान से ही ग्राहकों को बेचा जाता है. वे किसी डिस्ट्रीब्यूटर या बडे बाजार पर निर्भर नहीं हैं. उनका मानना है कि सीधे ग्राहक से जुडना ज्यादा भरोसे का रिश्ता बनाता है.

शुरुआत का डर और परिवार का साथ:

नौकरी छोडते वक्त हरिश को डर जरूर लगा था. उनके मन में यह सवाल बार बार आता था कि बिजनेस चलेगा या नहीं. इस दौर में परिवार का साथ उनके लिए सबसे बडा सहारा बना. खासकर उनके बडे भाइयों ने उन्हें हौसला दिया और आगे बढने की ताकत दी. हरिश खुद कहते हैं कि डर तो था, लेकिन यह भी पता था कि बिना कोशिश किए कुछ बदलने वाला नहीं है.

धीरे धीरे बनता भरोसा:

फिलहाल बिक्री पूरी तरह दुकान से ही हो रही है. ज्यादातर ग्राहक मुंह से मुंह की पहचान से आते हैं. तेल की खुशबू और स्वाद लोगों को पसंद आ रहा है. नियमित ग्राहक वापस आ रहे हैं, जिससे हरिश का भरोसा भी बढ रहा है.

विस्तार से पहले स्थिरता जरूरी:

खरीद, उत्पादन और बिक्री सब कुछ खुद संभालना हरिश के लिए एक नया अनुभव है. नौकरी के दौरान उन्होंने यह सब कभी नहीं किया था. आगे चलकर वे अपने कोल्ड प्रेस्ड सरसों तेल को एक पहचान देना चाहते हैं, लेकिन तभी, जब उन्हें पूरा भरोसा हो जाए. फिलहाल उनके लिए सबसे जरूरी है काम को स्थिर रखना और ग्राहकों का भरोसा बनाए रखना और अभी वे यही कर रहे है.

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