बिहार सरकार किसानों की आमदनी बढ़ाने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने के लिए लगातार नई पहल कर रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में एकीकृत बागवानी विकास मिशन के अंतर्गत पपीता की खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पपीता विकास योजना संचालित की जा रही है। इस योजना के माध्यम से किसानों को पपीता की खेती के विस्तार के लिए अनुदान दिया जा रहा है, ताकि वे कम लागत में बेहतर उत्पादन कर सकें। सरकार का मानना है कि इस योजना के माध्यम से पपीता जैसी नकदी फसल से किसानों को स्थायी आमदनी का मजबूत जरिया मिलेगा।
योजना का उद्देश्य:
पपीता एक ऐसी फसल है जो कम समय में तैयार हो जाती है और बाजार में इसकी लगातार मांग बनी रहती है। इससे किसानों को जल्दी आमदनी मिलती है और खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है। इसलिए पपीता विकास योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य में पपीता की खेती का रकबा बढ़ाना और किसानों को नकदी फसल की ओर प्रेरित करना है।
लागत और अनुदान का प्रावधान:
पपीता की खेती के लिए प्रति हेक्टेयर 75,000 रुपये की इकाई लागत तय की गई है। इसमें से 60 प्रतिशत राशि अनुदान के रूप में किसानों को दी जाएगी। इस तरह किसानों को प्रति हेक्टेयर 45,000 रुपये की सीधी आर्थिक सहायता मिलेगी। इससे किसानों पर खेती का आर्थिक बोझ कम होगा और वे बिना ज्यादा जोखिम के पपीता की खेती शुरू कर सकेंगे।
दो चरणों में मिलेगा अनुदान:
सरकार द्वारा अनुदान की राशि दो वित्तीय वर्षों में किसानों को प्रदान की जाएगी। वित्तीय वर्ष 2025 26 में 27,000 रुपये की राशि दी जाएगी, जबकि वित्तीय वर्ष 2026 27 में शेष 18,000 रुपये का भुगतान किया जाएगा। इससे किसानों को खेती के विभिन्न चरणों में लगातार आर्थिक सहयोग मिलता रहेगा।
आवेदन की अंतिम तिथि:
पपीता विकास योजना के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 31 जनवरी 2026 निर्धारित की गई है। सरकार ने किसानों से अपील की है कि वे समय रहते आवेदन कर योजना का लाभ उठाएं, ताकि किसी भी प्रकार की परेशानी से बचा जा सके।
ऑनलाइन आवेदन की सुविधा:
योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन बनाया गया है। इच्छुक किसान horticulture.bihar.gov.in वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं।
किसानों की आमदनी बढ़ाने की दिशा में अहम पहल:
सरकार का कहना है कि पपीता विकास योजना से न केवल पपीता की खेती को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि किसानों को स्थायी आमदनी का मजबूत साधन भी मिलेगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, किसानों का जीवन स्तर सुधरेगा और गांवों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। यह योजना आत्मनिर्भर किसान और समृद्ध बिहार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

