हर सुबह तय समय पर दफ्तर पहुंचना, लैपटॉप खोलते ही फाइलों और नंबरों की दुनिया में खो जाना और दिन खत्म होने पर थकान के साथ घर लौट आना, सीए आर्टिकलशिप के दौरान अंकित शर्मा की यही रोज की जिंदगी बन चुकी थी। वैसे बाहर से देखने पर सब कुछ ठीक लगता था। प्रोफेशनल कोर्स चल रहा था, बड़े क्लाइंट्स के साथ काम मिल रहा था और एक सफल करियर का रास्ता भी साफ नजर आ रहा था। लेकिन इस तयशुदा रूटीन के बीच कहीं न कहीं अंकित के मन में हमेशा एक बेचैनी बनी रहती थी और काम करते हुए हमेशा ख्याल आता रहता था कि क्या आने वाले साल भी इसी तरह फाइलों, रिपोर्ट्स और आंकड़ों के बीच ही गुजर जाएंगे।
वैसे तो इन सब सवालों के बीच अंकित पूरी जिम्मेदारी से अपना काम करते थे, लेकिन अपना खुद का कुछ करने का सवाल हमेशा उन्हें परेशान करता था। और फिर कोविड महामारी का दौर आया, जिसके चलते कई बिजनेस बंद हो रहे थे और नौकरियों पर खतरा मंडरा रहा था। ऐसे समय में अंकित जब बड़ी कंपनियों के फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स देखते थे, तो उन्हें साफ फर्क नजर आने लगा कि कौन से बिजनेस मुश्किल हालात में भी टिके रहते हैं और कौन से थोड़े से झटके में बिखर जाते हैं। और फिर यही देखने समझने की प्रक्रिया धीरे-धीरे उनके सोचने का नजरिया बदलने लगी और उन्होंने खुद का बिजनेस शुरू करने का फैसला कर लिया।
कोविड के समय दिखी असली जरूरत:
कोविड के दौरान अंकित ने एक अहम बात नोटिस की कि कुछ प्रोडक्ट ऐसे होते हैं जिनकी जरूरत हालात चाहे जैसे हों, खत्म नहीं होती। मसालों की जरूरत भी उन्हीं में से एक है। क्योंकि मसाले कोई लग्जरी चीज नहीं हैं, जिन्हें लोग आसानी से छोड़ दें। हर घर की रसोई में इनकी आवश्यकता हमेशा बनी रहती है। वहीं दूसरी तरफ बाजार में मिलने वाले मसाले भी अब मिलावट के चलते स्वास्थ्य के लिए दिन-ब-दिन एक बड़ी समस्या बनते जा रहे हैं। और यहीं से अंकित ने मसालों का कारोबार शुरू करने का फैसला किया। वो भी बिना किसी शॉर्टकट और मिलावट के। क्योंकि अंकित का मानना था कि अगर स्वाद और शुद्धता बनी रहे, तो ग्राहक खुद उनसे जुड़ते चले जाएंगे।
बिजनेस का अनुभव नहीं लेकिन सीखने के लिए तैयारी:
अंकित के परिवार में कोई भी बिजनेस से जुड़ा नहीं था। उनके पिता किसान हैं और परिवार के बाकी सदस्य नौकरीपेशा रहे हैं। ऐसे में उनके पास बिजनेस से जुड़ा कोई तैयार मॉडल नहीं था। उन्हें सब कुछ खुद सीखना और करना था। इसलिए उन्होंने सबसे पहले बाजार को समझना शुरू किया। बड़े ब्रांड कैसे काम करते हैं, कौन सी मशीनें इस्तेमाल होती हैं, मसालों को कैसे सुरक्षित रखा जाता है और हर बार स्वाद एक जैसा कैसे रखा जाए। ऐसी ही मसालों से जुड़े कई सवालों की जानकारी हासिल करने के साथ ही वे खुद कच्चे माल के बाजारों में जाकर मसालों की क्वालिटी और कीमत का फर्क भी नजदीक से देखने लगे। और फिर उन्हें यहीं से समझ आया कि सही कच्चा माल चुनना कितना जरूरी है, जिससे मसालों की क्वालिटी और स्वाद दोनों बने रहें।
बिना किसी दिखावे के छोटी शुरुआत:
मसालों से जुड़ी जानकारी हासिल करने के बाद अंकित ने साल 2021 में बहुत ही सीमित स्तर पर काम करना शुरू किया। क्योंकि शुरुआती यह दौर उनके लिए सीखने का था। इसलिए उन्होंने अपने बिजनेस से जुड़ी कोई भी बात किसी से साझा नहीं की। यहां तक कि अपने परिवार वालों को भी उन्होंने साल 2025 में तब बताया, जब वे अपने बिजनेस को लेकर पूरी तरह तैयार और निश्चित हो चुके थे।
सरकारी योजना से मिला सहारा:
किसी भी बिजनेस की शुरुआत करने के लिए पैसे बेहद जरूरी होते हैं। और यही सवाल अंकित को भी परेशान कर रहा था कि पैसे कहां से आएंगे। इसी बीच सोशल मीडिया रील्स देखते समय उन्हें एक सरकारी लोन योजना की जानकारी मिली। जिसे देखने के बाद उन्होंने पूरी प्रक्रिया समझी, जरूरी कागजात जुटाए और जिला उद्योग केंद्र पहुंच गए। जिसके कुछ दिनों के बाद ही उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान योजना, सीएम युवा योजना के तहत आवेदन किया और कुछ ही दिनों बाद पंजाब नेशनल बैंक से लोन मिल गया।
गाजियाबाद में की शुरुआत:
लोन मिलने के बाद अंकित ने गाजियाबाद में अपनी यूनिट लगाई। मशीनें खरीदीं। कच्चे माल और पैकेजिंग की व्यवस्था की। ट्रेडमार्क से जुड़े काम पूरे किए। एक फूड कंसल्टेंट की मदद से रेसिपी को स्टैंडर्ड किया गया, ताकि हर बार स्वाद एक जैसा रहे। इसी तरह पूरक स्पाइसेज ब्रांड की नींव पड़ी।
महिलाओं का साथ और सीधे ग्राहक से जुड़ाव है ताकत:
अंकित की यूनिट में पांच महिलाएं काम करती हैं। जो सफाई से लेकर छंटाई, पीसने और पैकिंग तक की जिम्मेदारी वही संभालती हैं। वहीं अंकित खुद बिक्री और सप्लाई चैन देखते हैं। आज अंकित अपने पैकेज्ड मसाले सीधे ग्राहकों को भी बेचते हैं और रिटेलर्स व कैटरर्स को भी सप्लाई करते हैं। उन्हें सबसे ज्यादा मदद सीधे ग्राहकों से मिलने वाले फीडबैक से मिलती है। इससे वे अपने प्रोडक्ट को लगातार बेहतर बना पा रहे हैं।
अंकित की कहानी किसी रातों-रात मिली सफलता की नहीं बल्कि यह कोविड के समय उपजे एक विचार से शुरू हुए सफर कि है, जो आज एक सफल बिजनेस बन चुका है।
